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UPI सेवाएं फिर बाधित, लगातार चौथी बार खराबी से परेशान हुए यूजर्स

UPI सेवाएं शनिवार को फिर बाधित रहीं, लगातार चौथी बार तकनीकी खराबी के कारण यूजर्स को लेन-देन में परेशानी हुई। NPCI ने खेद जताते हुए समाधान का आश्वासन दिया है।

UPI सेवाएं शनिवार को एक बार फिर बाधित हो गईं, जिससे लाखों यूजर्स को डिजिटल भुगतान में दिक्कत का सामना करना पड़ा। पेटीएम, गूगल पे और फोनपे जैसे प्रमुख ऐप्स पर लेन-देन लगातार फेल हो रहे थे। यह इस महीने की चौथी बार है जब UPI नेटवर्क में तकनीकी खामी आई है। ऐसे में यूजर्स सोशल मीडिया पर नाराज़गी जताते दिखे और NPCI की तैयारी पर सवाल उठाने लगे।

डाउनडिटेक्टर वेबसाइट के अनुसार, शनिवार सुबह 11:26 बजे के आसपास समस्याएं शुरू हुईं और 11:40 तक 222 से अधिक फेल ट्रांजैक्शन की शिकायतें दर्ज की गईं। लोगों को दुकानों, ऑटो और अन्य स्थानों पर नकद के बिना परेशानी उठानी पड़ी।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बयान जारी कर कहा, “हम कुछ तकनीकी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं, जिससे आंशिक UPI ट्रांजैक्शन विफल हो रहे हैं। हम समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं और असुविधा के लिए खेद जताते हैं।”

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जमकर प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने लिखा, “कम से कम अगर कोई शेड्यूल्ड आउटेज होता है, तो हमें पहले से सूचना मिलनी चाहिए।” वहीं एक अन्य ने कहा, “कैश नहीं था, ऑटो वाले को किराया नहीं दे पाया। अब समय आ गया है कि देश को एक ज़ीरो-डाउनटाइम UPI इंफ्रास्ट्रक्चर मिले।”

मार्च और अप्रैल में अब तक चार बार ऐसी दिक्कतें सामने आ चुकी हैं। 26 मार्च, 31 मार्च और 2 अप्रैल को भी इसी तरह की समस्याएं आई थीं। NPCI ने अलग-अलग बार ‘तकनीकी खराबी’, ‘बैंक-साइड डिले’ और ‘नेटवर्क लेटेंसी’ को इसकी वजह बताया था।

इसके विपरीत, UPI का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक जनवरी 2025 में 16.99 बिलियन ट्रांजैक्शन हुए, जिनका कुल मूल्य 23.48 लाख करोड़ रुपये से अधिक था। मंत्रालय ने कहा, “UPI सेवाएं देश के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम की रीढ़ बन चुकी हैं और 80% खुदरा लेन-देन इन्हीं के ज़रिए होते हैं।”

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लेकिन सवाल यह है कि इतनी महत्वपूर्ण सेवा बार-बार ठप क्यों हो रही है? क्या हम एक स्थिर और विश्वसनीय डिजिटल भुगतान प्रणाली की ओर बढ़ रहे हैं या फिर प्रचार की चकाचौंध में बुनियादी मजबूती को नजरअंदाज़ किया जा रहा है?

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Written by: The Jan Post
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