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द्वारका के शब्द अपार्टमेंट में आग से पिता और दो बच्चों की मौत

द्वारका शब्द अपार्टमेंट में आग से एक पिता और दो बच्चों की मौत, फायर सेफ्टी की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही सामने आई।

दिल्ली के द्वारका सेक्टर-13 स्थित शब्द अपार्टमेंट में 10 जून 2025 की सुबह भीषण आग लग गई। आग सातवीं मंजिल पर लगी और तेजी से फैल गई। इस हादसे में एक पिता यश यादव और उनके दो बच्चों की मौत हो गई, जब वे आग से बचने के लिए सातवीं मंजिल से कूद गए। दिल्ली फायर सर्विस ने आठ फायर टेंडर भेजकर आग पर काबू पाया, लेकिन तीनों की जान नहीं बचाई जा सकी। यह घटना राजधानी में बढ़ते आग के हादसों और सुरक्षा उपायों की कमी को उजागर करती है।

आग की भयावहता और बचाव अभियान की चुनौतियां

सुबह 10 बजे आग की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंची। आग इतनी तेज थी कि धुआं आसपास के इलाकों में फैल गया और कई लोग फंस गए। फायर टेंडर को संकरी गलियों और भीड़ की वजह से पहुंचने में देरी हुई। स्काय लिफ्ट और अन्य उपकरणों की मदद से बचाव अभियान चलाया गया, लेकिन सातवीं मंजिल पर फंसे लोगों को समय रहते नहीं बचाया जा सका। इमारत का स्ट्रक्चरल डिजाइन और फायर सेफ्टी मानकों की कमी ने बचाव कार्य को और मुश्किल बना दिया।

पीड़ित परिवार और समुदाय की प्रतिक्रिया

यश यादव अपने दोनों छोटे बच्चों के साथ आग में फंस गए थे और सीढ़ियों तक पहुंचना मुश्किल हो गया था। घबराहट में उन्होंने बच्चों के साथ खिड़की से कूदने का फैसला किया, जो घातक साबित हुआ। उनकी पत्नी और बड़ा बेटा गंभीर सदमे में हैं। घटना के बाद स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी पर नाराजगी जताई। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने पहले भी अधिकारियों को शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन ने मृतकों के परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है।

दिल्ली में आग की घटनाएं: कारण और समाधान

केवल जून 2025 के पहले सप्ताह में ही दिल्ली में 47 आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं। पुराने अपार्टमेंट्स में फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी, बिजली की ओवरलोडिंग और उच्च तापमान मुख्य कारण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट फायर डिटेक्शन सिस्टम, ऑटोमेटेड स्प्रिंकलर और नियमित सुरक्षा ऑडिट जरूरी हैं। दिल्ली सरकार ने ‘फायर सेफ्टी मिशन’ के तहत 1000 पुरानी इमारतों को मुफ्त सुरक्षा उपकरण देने की योजना बनाई है। सामुदायिक स्तर पर फायर ड्रिल और ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शुरू किए जाएंगे।

शोक, सहानुभूति और सुधार की आवश्यकता

इस घटना ने न केवल आग के खतरों को उजागर किया है, बल्कि मनोवैज्ञानिक आघात की समस्या भी सामने लाई है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के लिए काउंसलिंग सेल स्थापित करने की घोषणा की है। सोशल मीडिया पर #SafetyForDelhi और #JusticeForYadavFamily ट्रेंड कर रहे हैं, जिसमें नागरिक बेहतर फायर सेफ्टी की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कानूनों का सख्ती से पालन और नागरिकों की जागरूकता ही ऐसी त्रासदियों को रोक सकती है। यश यादव और उनके बच्चों की मौत व्यर्थ न जाए, इसके लिए सामूहिक प्रयास और नीतिगत सुधार जरूरी हैं।

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रीतु कुमारी The Jan Post की एक उत्साही लेखिका हैं, जिन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई बीजेएमसी (BJMC), JIMS इंजीनियरिंग मैनेजमेंट एंड टेक्निकल कैंपस ग्रेटर नोएडा से पूरी की है। वे समसामयिक समाचारों पर आधारित कहानियाँ और रिपोर्ट लिखने में विशेष रुचि रखती हैं। सामाजिक मुद्दों को आम लोगों की आवाज़ बनाकर प्रस्तुत करना उनका उद्देश्य है। लेखन के अलावा रीतु को फोटोग्राफी का शौक है, और वे एक अच्छी फोटोग्राफर बनने का सपना भी देखती है। रीतु अपने कैमरे के ज़रिए समाज के अनदेखे पहलुओं को उजागर करना चाहती है।

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