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हापुड़ का छिजारसी टोल प्लाजा: फास्टैग विवादों का अखाड़ा

छिजारसी टोल पर फास्टैग खराबी के नाम पर मारपीट, जबरन वसूली और सिस्टम फेलियर की घटनाएं सामने, प्रशासन ने जांच और सुधार शुरू किए।

छिजारसी टोल प्लाजा, जो हापुड़-दिल्ली एनएच-9 पर स्थित है, पिछले दो वर्षों से लगातार विवादों में घिरा हुआ है। यह टोल बूथ अब एक ऐसा अखाड़ा बन गया है जहाँ फास्टैग तकनीकी खराबी के नाम पर यात्रियों के साथ हो रही बदसलूकी, मारपीट और जबरन वसूली की घटनाएँ सामने आ रही हैं। मई-जून 2025 के दौरान यहाँ दो अलग-अलग घटनाओं ने राष्ट्रीय सुर्खियाँ बटोरीं, पहली 30 मई को प्रदीप कुमार के साथ सोने की अंगूठी की जबरन वसूली और दूसरी 1 जून को वकील सहायक असीम चौधरी के साथ हिंसक घटना। इन घटनाओं ने न केवल राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए, बल्कि टोल प्रबंधन में व्याप्त व्यवस्थागत विफलताओं को भी उजागर किया।  

हालिया घटनाओं का विस्तृत ब्यौरा  

30 मई की देर रात जब प्रदीप कुमार गाजियाबाद से लौट रहे थे, तो छिजारसी टोल प्लाजा पर उनकी कार का फास्टैग तकनीकी खराबी के कारण काम नहीं कर रहा था। टोल कर्मियों – विपिन राठी और कुलदीप ने नकद भुगतान न होने पर उनसे ₹25,000 मूल्य की सोने की अंगूठी माँगी। प्रदीप के विरोध करने पर चार कर्मियों ने उनकी कार को घेर लिया और जबरदस्ती अंगूठी उतरवा ली। पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हुई, जिसमें साफ दिखाई देता है कि कर्मी प्रदीप के हाथ पकड़कर अंगूठी निकाल रहे थे। प्रदीप ने पुलिस हेल्पलाइन 112 पर कॉल किया, जिसके दबाव में टोल प्रबंधन ने दो घंटे बाद अंगूठी लौटाई।

मात्र दो दिन बाद 1 जून की रात हापुड़ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष के सहायक असीम चौधरी दिल्ली एयरपोर्ट जाते समय इसी टोल प्लाजा पर रुके। जब उनका फास्टैग भी तकनीकी खराबी के कारण स्कैन नहीं हुआ, तो कर्मियों ने उन्हें अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते हुए धक्का दिया और शारीरिक प्रताड़ित किया। इस दौरान उनके हाथ से सोने की अंगूठी छीन ली गई। असीम ने तुरंत कोतवाली पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुँची और कर्मियों से अंगूठी वापस दिलवाई। दिलचस्प बात यह है कि टोल प्रबंधन ने दावा किया कि असीम ने स्वेच्छा से अंगूठी दी थी, जबकि पीड़ित के अनुसार उन्हें शारीरिक हिंसा की धमकी दी गई थी।  

पिछले विवादों का कालक्रम: एक समस्याग्रस्त टोल का इतिहास  

छिजारसी टोल प्लाजा का विवादों का इतिहास काफी पुराना है। अप्रैल 2025 में यहाँ एक महिला ने टोल कर्मी को मात्र 4 सेकंड में 7 थप्पड़ मारे थे, जिसका कारण फास्टैग में खराबी बताया गया था। इससे पहले जून 2024 में एक बुलडोजर चालक ने शराब के नशे में टोल बूथ नंबर 15 और 16 को तोड़ डाला था, क्योंकि वह टोल टैक्स का विरोध कर रहा था। अगस्त 2023 की एक और भीषण घटना में एक कार चालक सतपाल उर्फ सोनू ने टोल कर्मी शेखर यादव को जानबूझकर कुचलने का प्रयास किया था, जिसके बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर ₹10,000 का इनाम घोषित किया था।

इन घटनाओं से स्पष्ट है कि यह टोल प्लाजा कर्मियों और यात्रियों के बीच तनाव का नियमित अखाड़ा बन चुका है। 2023 से अब तक यहाँ 20 से अधिक हिंसक घटनाएँ दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें अधिकांश का कारण फास्टैग खराबी या भुगतान विवाद रहा है। ट्रांसपोर्ट विशेषज्ञ डॉ. राजीव शर्मा के अनुसार, यह टोल प्लाजा यूपी दिल्ली बॉर्डर पर स्थित होने के कारण भारी ट्रैफिक झेलता है और प्रतिदिन 30,000+ वाहनों की आवाजाही के बीच अपर्याप्त स्टाफ और प्रशिक्षण की कमी विवादों को जन्म देती है।  

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और कानूनी पहलू  

प्रदीप कुमार की घटना के वायरल होने पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए टोल संचालक कंपनी पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया। शामिल कर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया और सभी टोल्स के लिए निर्देश जारी किए गए कि भुगतान विवाद में किसी भी प्रकार की जबरदस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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हापुड़ पुलिस ने दोनों घटनाओं में त्वरित हस्तक्षेप किया। असीम चौधरी के मामले में पुलिस ने IPC की धारा 392 (डकैती) और 323 (मारपीट) के तहत मामला दर्ज किया, जबकि प्रदीप कुमार के मामले में धारा 383 (जबरन वसूली) लागू की गई। वरिष्ठ वकील ऋतु राज के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत टोल कर्मियों के खिलाफ धारा 115(2), 124, 131 और 352 भी लागू हो सकती हैं, जिनमें 1 से 7 वर्ष तक की कैद का प्रावधान है, विशेषकर यदि कर्मी सरकारी कर्तव्य का पालन करते हुए उत्पीड़न में शामिल पाए जाते हैं।

घटनाओं के बाद टोल प्रबंधन के विवादास्पद बयान सामने आए, जहाँ पिलखुवा के प्रभारी निरीक्षक पटनीश कुमार ने दावा किया कि असीम ने स्वेच्छा से अंगूठी दी थी, जबकि टोल के सहायक मैनेजर नितिन राठी ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज में मारपीट का कोई सबूत नहीं मिला, ये बयान पीड़ितों के आरोपों से सीधे विरोधाभास रखते हैं।  

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रीतु कुमारी The Jan Post की एक उत्साही लेखिका हैं, जिन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई बीजेएमसी (BJMC), JIMS इंजीनियरिंग मैनेजमेंट एंड टेक्निकल कैंपस ग्रेटर नोएडा से पूरी की है। वे समसामयिक समाचारों पर आधारित कहानियाँ और रिपोर्ट लिखने में विशेष रुचि रखती हैं। सामाजिक मुद्दों को आम लोगों की आवाज़ बनाकर प्रस्तुत करना उनका उद्देश्य है। लेखन के अलावा रीतु को फोटोग्राफी का शौक है, और वे एक अच्छी फोटोग्राफर बनने का सपना भी देखती है। रीतु अपने कैमरे के ज़रिए समाज के अनदेखे पहलुओं को उजागर करना चाहती है।

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