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तुर्किये की सियासी हलचल: भारत के लिए एक सबक!

तुर्किये में मेयर इमामोग्लू की गिरफ्तारी के बाद देशभर में विरोध तेज़, अब तक 1,400 से अधिक लोग हिरासत में। भारत के लिए यह संकट लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आज़ादी और न्यायिक स्वतंत्रता को लेकर महत्वपूर्ण सबक छोड़ता है।

इस्तांबुल: तुर्किये में इस्तांबुल के मेयर एकरेम इमामोग्लू की गिरफ्तारी के बाद देशभर में विरोध शुरू हो गए हैं। वे राष्ट्रपति एर्दोगन के बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं। अब तक 1,400 से ज़्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें छात्र, पत्रकार और वकील शामिल हैं।

राष्ट्रपति एर्दोगन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की, वहीं छात्रों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। प्रशासन ने कई इलाकों में प्रदर्शन पर रोक लगाई है। विपक्षी पार्टी ने शनिवार को बड़ी रैली का ऐलान किया है।

कुछ पत्रकारों को भी गिरफ्तार किया गया है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय आलोचना हो रही है। अमेरिका ने भी तुर्की की कार्रवाई पर चिंता जताई है। कहा जा रहा है कि एर्दोगन समय से पहले चुनाव या संविधान में बदलाव कर सकते हैं।

भारत तुर्किये संकट से क्या सीख सकता है?

1. लोकतंत्र की असल ताकत – विपक्ष का सम्मान

तुर्की में विपक्षी नेता इमामोग्लू की गिरफ़्तारी ने देशभर में आक्रोश फैला दिया। भारत को यह समझना चाहिए कि विपक्ष लोकतंत्र का आवश्यक अंग है, और किसी भी तरह की राजनीतिक बदले की भावना जनता के बीच भरोसे को कमजोर करती है।

2. न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखना

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तुर्किये में न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। भारत को यह सीख लेनी चाहिए कि न्याय व्यवस्था को राजनीतिक दबाव से दूर रखना लोकतंत्र की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है।

3. शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान

प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की सख़्ती ने तुर्की सरकार की आलोचना को बढ़ाया। भारत में भी कई बार शांतिपूर्ण आंदोलनों को दबाने की कोशिश की जाती है। सरकार को चाहिए कि वह असहमति की आवाज़ को कुचलने की बजाय सुनने की नीति अपनाए

4. मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा

तुर्की में पत्रकारों की गिरफ़्तारी से अभिव्यक्ति की आज़ादी पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। भारत में भी प्रेस की स्वतंत्रता को बनाए रखना जरूरी है ताकि लोकतंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता बनी रहे।

5. राजनीतिक अस्थिरता से बचने के लिए संवाद ज़रूरी है

तुर्की में सत्ताधारी और विपक्ष के बीच संवाद की कमी ने हालात बिगाड़े। भारत को यह समझना होगा कि लोकतंत्र में संवाद और सहमति के रास्ते ही स्थिरता ला सकते हैं

तुर्किये की स्थिति भारत के लिए एक चेतावनी और सीख दोनों है—कि लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं, बल्कि संस्थाओं की मजबूती, आलोचना को स्वीकारने की भावना और नागरिक अधिकारों की रक्षा से टिकाऊ बनता है।

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राजनीश कुमार एक प्रखर और दृष्टिकोणपूर्ण पत्रकार हैं जो वर्तमान में The Jan Post न्यूज़ पोर्टल में विदेश समाचार एवं नीतियों के संपादक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी स्नातक शिक्षा दिल्ली के प्रतिष्ठित नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (NSUT) से प्राप्त की है। इसके पश्चात, उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स (DSE Delhi) से अर्थशास्त्र में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की। राजनीश की रुचि अंतरराष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक नीतिगत निर्णयों और सामाजिक न्याय के मुद्दों में विशेष रूप से रही है। उनका लेखन तटस्थ, तथ्यों पर आधारित और व्यापक विश्लेषण से परिपूर्ण होता है, जो पाठकों को समकालीन वैश्विक घटनाओं की गहराई से जानकारी प्रदान करता है। अपने अनुभव और विद्वत्ता के बल पर राजनीश कुमार OBC Awaaz के माध्यम से वंचित तबकों की आवाज़ को वैश्विक मंच तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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